Saturday, 12 March 2016

विचार मंथन
  • ·                     एकता का किला सबसे सुरक्षित होता है। न वह टूटता है और न उसमें रहने वाला कभी दुखी होता है।      - अज्ञात
  • ·                     किताबें ऐसी शिक्षक हैं जो बिना कष्ट दिए, बिना आलोचना किए और बिना परीक्षा लिए हमें शिक्षा देती हैं। - अज्ञात
  • ·                     ऐसे देश को छोड़ देना चाहिए जहाँ न आदर है, न जीविका, न मित्र, न परिवार और न ही ज्ञान की आशा।   - विनोबा
  • ·                     विश्वास वह पक्षी है जो प्रभात के पूर्व अंधकार में ही प्रकाश का अनुभव करता है और गाने लगता है।    - रवींद्रनाथ ठाकुर
  • ·                     कुल की प्रतिष्ठा भी विनम्रता और सदव्यवहार से होती है, हेकड़ी और रुआब दिखाने से नहीं। - प्रेमचंद
  • ·                     अनुभव की पाठशाला में जो पाठ सीखे जाते हैं, वे पुस्तकों और विश्वविद्यालयों में नहीं मिलते।              - अज्ञात
  • ·                     जिस प्रकार थोड़ी-सी वायु से आग भड़क उठती है, उसी प्रकार थोड़ी-सी मेहनत से किस्मत चमक उठती है।        - अज्ञात
  • ·                     अपने को संकट में डाल कर कार्य संपन्न करने वालों की विजय होती है, कायरों की नहीं। - जवाहरलाल नेहरू
  • ·                     सच्चाई से जिसका मन भरा है, वह विद्वान न होने पर भी बहुत देश सेवा कर सकता है।        - पं. मोतीलाल नेहरू
  • ·                     स्वतंत्र वही हो सकता है जो अपना काम अपने आप कर लेता है।- विनोबा
  • ·                     जिस तरह रंग सादगी को निखार देते हैं उसी तरह सादगी भी रंगों को निखार देती है। सहयोग सफलता का सर्वश्रेष्ठ उपाय है।   - मुक्ता
  • ·                     दुख और वेदना के अथाह सागर वाले इस संसार में प्रेम की अत्यधिक आवश्यकता है।        - डॉ. रामकुमार वर्मा
  • ·                     डूबते को तारना ही अच्छे इंसान का कर्तव्य होता है।    - अज्ञात
  • ·                     सबसे अधिक ज्ञानी वही है जो अपनी कमियों को समझकर उनका सुधार कर सकता हो।   - अज्ञात
  • ·                     अनुभव-प्राप्ति के लिए काफ़ी मूल्य चुकाना पड़ सकता है पर उससे जो शिक्षा मिलती है वह और कहीं नहीं मिलती।    - अज्ञात
  • ·                     जिसने अकेले रह कर अकेलेपन को जीता उसने सबकुछ जीता।- अज्ञात
  • ·                     अच्छी योजना बनाना बुद्धिमानी का काम है पर उसको ठीक से पूरा करना धैर्य और परिश्रम का।        - कहावत
  • ·                     जो पुरुषार्थ नहीं करते उन्हें धन, मित्र, ऐश्वर्य, सुख, स्वास्थ्य, शांति और संतोष प्राप्त नहीं होते।   - वेदव्यास
  • ·                     नियम के बिना और अभिमान के साथ किया गया तप व्यर्थ ही होता है।
  • - वेदव्यास
  • ·                     जैसे सूर्योदय के होते ही अंधकार दूर हो जाता है वैसे ही मन की प्रसन्नता से सारी बाधाएँ शांत हो जाती हैं।  - अमृतलाल नागर
  • ·                     जैसे उल्लू को सूर्य नहीं दिखाई देता वैसे ही दुष्ट को सौजन्य दिखाई नहीं देता।  - स्वामी भजनानंद
  • ·                     लोहा गरम भले ही हो जाए पर हथौड़ा तो ठंडा रह कर ही काम कर सकता है।  - सरदार पटेल
  • ·                     एकता का किला सबसे सुदृढ़ होता है। उसके भीतर रह कर कोई भी प्राणी असुरक्षा अनुभव नहीं करता।     - अज्ञात
  • ·                     फूल चुन कर एकत्र करने के लिए मत ठहरो। आगे बढ़े चलो, तुम्हारे पथ में फूल निरंतर खिलते रहेंगे।      - रवींद्रनाथ ठाकुर



साभार - http://www.abhivyakti-hindi.org


Thursday, 10 March 2016

सोनुभाऊ बसवंत महाविद्यालयातील उल्लेखनीय कार्य
v इंटरनेट सुविधा :-
          महाविद्यालयीन विद्यार्थ्यांना अद्यावत ज्ञान संपादन करता यावे याकरिता आपल्या महाविद्यालयामध्ये विद्यार्थ्यांकरिता इंटरनेट सुविधा सुरू करण्यात आलेली आहे. त्याचबरोबर आजच्या संगणक युगात आधुनिक तंत्रज्ञानाचा शिक्षणात जास्तीत – जास्त वापर करता यावा याकरिता सर्व प्राध्यापकांना लॅप-टॉप प्रदान करण्यात आलेले आहेत.
v डिजिटल क्लासरूम :-
           आपल्या महाविद्यालयात शिक्षण घेत असलेल्या सर्व विद्यार्थ्यांना दर्जेदार शिक्षण मिळावे, त्यांची आकलन क्षमता वाढावी याकरिता महाविद्यालयातील सर्व क्लासरूम अत्याधुनिक तंत्रज्ञानाने सुसज्ज करण्यात आलेले आहेत. काही मोजक्या महाविद्यालयांमध्ये अश्या प्रकारची सुविधा उपलब्ध आहे . अश्या मोजक्या महाविद्यालयांमध्ये आपले महाविद्यालय आहे.
v सुसज्ज ग्रंथालय :-
           मुंबई विद्यापीठांतर्गत येणार्‍या काही मोजक्या महाविद्यालयांच्या सुसज्ज ग्रंथालयांपैकी आपल्या महाविद्यालयातील ग्रंथालय हे एक सुसज्ज ग्रंथालय आहे. या ग्रंथालयातील पुस्तकांची सर्व देवाण-घेवाण ही SOUL Software द्वारे होत असून OPAC, Web OPAC चा पुस्तके शोधण्यासाठी वापर करण्यात येत आहे. आपल्या ग्रंथालयात N-LIST Consortia द्वारे 6000 पेक्षा जास्त ऑनलाइन आंतर्राष्ट्रीय नियतकालिके आणि 90000 पेक्षा अधिक ई-बुक्स वाचकांसाठी उपलब्ध आहेत. थोर राष्ट्रपुरुषांची जयंती ग्रंथालयात साजरी करीत असताना संबंधित व्यक्तीवर आधारित पुस्तकांचे प्रदर्शन भरविण्यात येते.
v राष्ट्रीय सेवा योजना :-
           महाविद्यालयातील राष्ट्रीय सेवा योजनेच्या वतीने समाजोपयोगी अनेक कार्यक्रमांचे आयोजन केले जाते. त्याचबरोबर विद्यार्थांच्या व्यक्तिमत्व विकासाच्या दृष्टीकोनातून  राष्ट्रीय सेवा योजनेच्या वतीने विविध कार्यक्रमांचे आयोजन केले जाते.
v सी.सी.टीव्ही. कॅमेरे :-
          महाविद्यालय व महाविद्यालयातील परिसरात काही अनुचित प्रकार घडू नये याकरिता आपल्या महाविद्यालयातील सर्व परीसर, वर्गखोल्या, ग्रंथालय, परीक्षा विभाग व सर्व कार्यालयांमध्ये सी.सी.टीव्ही. कॅमेरे बसविण्यात आलेले आहेत.
v व्ही. एल. सी. सेंटर :-
          आपल्या महाविद्यालयात व्हर्च्युअल लर्निंग सेंटर असून त्याचा महाविद्यालयातील विद्यार्थांना खूप फायदा होत आहे. तसेच या सेंटरचा विविध शासकीय, सामाजिक, व शैक्षणिक संस्थांना फायदा होत आहे. ठाणे जिल्ह्यातील ग्रामीण भागात फक्त आपल्या महाविद्यालयात हा उपक्रम राबविला जातो.
v एक रुपयात प्रवेश योजना:-
          आपले महाविद्यालय एक नावीन्यपूर्ण उपक्रम राबवित असून गरजू आणि गरीब विद्यार्थ्यांना आपल्या महाविद्यालयात नाममात्र एक रुपयात प्रवेश दिला जातो. प्रत्येक वर्षी अनेक विद्यार्थ्यांना या योजनेचा लाभ होत असतो.
v रिसर्च सेंटर :- 
          आपल्या महाविद्यालयात डॉ. अनिलकुमार सिंह यांच्या मार्गदर्शनाखाली हिन्दी संशोधन केंद्र कार्यरत असून त्यांच्या मार्गदर्शनाखाली पाच विद्यार्थी  विविध विषयांवर संशोधन करीत आहेत.
v एन.सी.सी. :-
          आपल्या महाविद्यालयात एन.सी.सी. यूनिट असून अनेक विद्यार्थी एन.सी.सी. यूनिट प्रशिक्षण  घेत असून त्याचा उपयोग त्यांना विविध विभागांमध्ये नोकरी मिळविण्यासाठी होत आहे.
v विद्यार्थिनी वसतिगृह :-
          आपल्या महाविद्यालयातील विद्यार्थिनी शिक्षण घेण्यासाठी दूरवरून येतात. केवळ अंतरामुळे विद्यार्थिंनींच्या शिक्षणात खंड पडू नये म्हणून महाविद्यालयाच्या परिसरात विद्यापीठ अनुदान आयोगाच्या सहकार्याने २४ खोल्यांचे प्रशस्त विद्यार्थिनी वसतिगृह बांधण्यात आलेले असून ७२ विद्यार्थिंनींची राहण्याची सोय झालेली आहे.
v प्राध्यापक वृंद :-

          आपल्या महाविद्यालयातील सर्व प्राध्यापकांची नेमणूक महाराष्ट्र शासन, मुंबई विद्यापीठ व विद्यापीठ अनुदान आयोगाच्या सर्व अतींचे पालन करून झालेली आहे.महाविद्यालयातील सर्व प्राध्यापक पूर्ण पात्रता धारण केलेले असून अर्धवेळ प्राध्यापक देखील नेट/सेट परिक्षा उत्तीर्ण झालेले आहेत. १००% पात्रताधारक प्राध्यापक असणारे मुंबई विद्यापीठातील हे एकमेव महाविद्यालय होय.   
शिवाजी का सच्चा स्वरूप
          बहुमुखी प्रतिभा के धनी सेठ गोविंददास हिन्दी-साहित्य के क्षेत्र में एक यशस्वी साहित्यकार के रूप में विख्यात है । यद्यपि सेठजी ने बड़े-बड़े नाटक, उपन्यास, जीवनी, यात्रा-संस्मरण आदि सभी साहित्यिक विधाओं में अपनी साहित्यिक प्रतिभा का परिचय दिया, तथापि एकांकी के सृजन में उन्हें जो कीर्ति एवं ख्याति प्राप्त हुई है, वह अन्य विधाओं में प्राप्त नहीं हुई है। उन्होने विपुल मात्रा में एकांकियों की रचना करके हिन्दी- एकांकी को समृद्ध एवं सम्पन्न बनाने का स्तुत्य प्रयास किया है ।
        सेठ गोविंददास ने शिवाजी का सच्चा स्वरूप नामक एकांकी का सृजन यदुनाथ सरकार के सुप्रसिद्ध ग्रंथ शिवाजी एंड हीज टाइम्स को आधार बनाकर किया है । इस एकांकी के माध्यम से लेखक ने भारतीय संस्कृति एवं भारतीय परंपरा के उज्ज्वल पक्ष का निरूपण किया है । लेखक ने अपनी एकांकियों में प्राय: ऐसे ही चरित्रों को प्रस्तुत किया है जो अपनी चारित्रिक विशेषता के कारण भारतीय सभ्यता का मस्तक ऊंचा उठाते है। सेठ गोविंददास का  शिवाजी का सच्चा स्वरूप एक अत्यंत महत्वपूर्ण ऐतिहासिक एकांकी नाटक है । इसमें शिवाजी महाराज के उदात्त चरित्र की झाँकी अंकित हुई है ।
        एक दिन संध्या के समय आवजी कल्याण-विजय के उपरांत शिवाजी महाराज के पास आते हैं और कल्याण की लूट में प्राप्त चाँदी, सोना, जवाहरात आदि के साथ-साथ एक अमूल्य तोफा लेकर शिवाजी महाराज की सेवा में प्रस्तुत करते है। यह अमूल्य तोफा था—कल्याण के सुभेदार अहमद की की अत्यंत सुंदर पुत्र-वधू, जिसे पालकी में बैठाकर आवाजी श्रीमंत शिवाजी महाराज की सेवा के लिए लाये थे। शिवाजी महाराज उसे देखते ही पहले तो अहमद की पुत्रवधू की क्षमा याचना करते है और कहते हैं कि, “आपको देखकर मेरे दिल में एक......... सिर्फ एक बात उठ रही है--- कहीं मेरी माँ में आपकी सी खूबसूरती होती तो मैं भी बदसूरत न होकर एक खूबसूरत शख्स होता । माँ आपकी खूबसूरती को मैं एक..... सिर्फ एक काम में ला सकता हूँ- उसका हिन्दू-विधि से पूजन करूँ ; उसकी इस्लामी तरीके से इबादत करूँ । आप जरा भी परेशान न हों । माँ, आपको आराम, इज्जत, हिफाजत और खबरदारी के साथ आपके शौहर के पास पहुँचा दिया जाएगा ; बिना देरी के, फौरन।”
        इतना कहकर शिवाजी महाराज आवाजी को भी फटकारते हैं, पश्चाताप प्रकट करते हैं और पेशवा को आज्ञा देते है कि भविष्य में अगर कोई ऐसा कार्य करेगा तो उसका सिर उसी समय धड़ से जुदा कर दिया जाएगा। इस प्रकार इस एकांकी में शिवाजी महाराज की सच्चरित्रता का उज्ज्वल उदाहरण प्रस्तुत किया गया है । इस एकांकी में छत्रपति शिवाजी महाराज के उदात्त चरित्र का चित्रांकन किया है। कल्याण की लूट में आवाजी सोनदेव द्वारा लायी गयी अहमद की पुत्रवधू को देखकर शिवाजी महाराज उसे माँ कहकर सम्बोधन करते है और उससे क्षमा-याचना करते है।  शिवाजी महाराज उसका केवल सम्मान एवं आदर ही नहीं करते, बल्कि सही-सलामत उसके घर भी भिजवा देते है और उस भयभीत युवती से स्पष्ट कहते हैं कि, आप जरा भी परेशान न हों । माँ, आपको आराम, इज्जत, हिफाजत और खबरदारी के साथ आपके शौहर के पास पहुँचा दिया जाएगा ; बिना देरी के, फौरन।”  इतना ही नहीं शिवाजी महाराज उस दिन यह भी घोषणा करते है कि, भविष्य में अगर कोई ऐसा कार्य करेगा, तो  उसका सिर उसी समय धड़ से जुदा कर दिया जाएगा।”
       अतएव शिवाजी महाराज के हृदय में नारी के लिए केवल सम्मान एवं आदर का ही भाव नही था, बल्कि वे सभी धर्मों का आदर करते थे, सभी धर्मों की पुस्तके पूज्य मानते थे, और सभी धर्मस्थानों का सन्मान करते थे। तभी तो शिवाजी महाराज ने कहा कि, शिव ने आज पर्यंत किसी मसजिद कि दीवाल में बाल बराबर दरार भी न आने दी । शिव को यदि कहीं कुरान की पुस्तक मिली तो उसने उसे सिर पर चढ़ा उसके एक पन्ने को भी किसी प्रकार की क्षति पहूँचाए बिना मौलवी साहब की सेवा मैं भेज दिया। हिन्दू होते हुए भी शिव के लिए इस्लाम-धर्म पूज्य है। ”
        इस तरह सेठ गोविंददास ने यहाँ शिवाजी महाराज के महान एवं उन्नत चरित्र का उदघाटन करते हुए उन्हें परनारी को माता मानने वाला, सभी धर्म पुस्तकों के प्रति श्रद्धा प्रकट करने वाला, सभी धर्मों को आदर देने वाला, सभी धर्मों के पवित्र स्थानों को पूज्य मानने वाला, हिन्दू और मुसलमान प्रजा में कोई भेद-भाव न मनाने वाला, आतताइयों से सत्ता अपहरण करके उदारचेताओं के हाथों में अधिकार देने वाला, रक्तपात एवं लूट-मार को घृणित कार्य मनाने वाला तथा सतत जागरूक एवं विवेकशील राजा के रूप में चित्रित किया है ।
        समग्रत: कहा जा सकता है कि, शिवाजी का सच्चा स्वरूप एकांकी में शिवाजी के ऐसे सुदृढ़ एव उत्कृष्ठ चरित्र की झाँकी अंकित की है, जिससे हमें परनारी को माता के समान पूज्य मानने की शिक्षा मिलती है, पर-धर्म को भी आदर देने का उपदेश मिलता है, दूसरों के धार्मिक ग्रन्थों को भी श्रेष्ठ मानने की भावना प्राप्त होती है, शील को सर्वोपरि मानने का आदेश मिलता है और इंद्रिय-लोलुपता को घृणा की दृष्टि से देखने का दृष्टिकोण प्राप्त होता है।
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पुस्तकालय अनावरण कार्यक्रम
      सोनुभाऊ बसवंत कला व वाणिज्य महाविद्यालय, शहापुर एवं हिंदुस्तानी प्रचार सभा, मुंबई द्वारा आयोजित सोनुभाऊ बसवंत महाविद्यालय एवं हिंदुस्तानी प्रचार सभा पुस्तकालयका उदघाटन समारोह दि. ०५/०३/२०१६ को प्रात: ११.०० बजे सम्पन्न हुआ। इस पुस्तकालय योजना का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों को पठन पाठन हेतु प्रेरित करना है। हिंदुस्तानी प्रचार सभा ने ग्रंथालय को पुस्तकें प्रदान की है जिसका लाभ अधिक से अधिक विद्यार्थी उठा सके। इस अवसर पर हिंदुस्तानी प्रचार सभा के ट्रस्टी व मानद सचिव श्री. फिरोज़ पैच प्रमुख अतिथि के रूप में उपस्थित थे । इस कार्यक्रम की अध्यक्षता ज्ञानवर्धिनी संस्था की कार्यकारी समिति के अध्यक्ष श्री. महेन्द्रभाई वासा ने की। इस अवसर पर कार्यकारी समिति के उपाध्यक्ष श्री. विलासजी क्षीरसागर, विश्वस्त समिति के सचिव श्री. बालकृष्ण पाटील, कार्यकारी समिति के सचिव श्री. दिलीप भोपतराव, विश्वस्त समिति के सहसचिव श्री. राजेन्द्र भोपतराव, कार्यकारी समिति के सदस्य श्री. पांडुरंग विशे, हिंदुस्तानी प्रचार सभा की विशेष कार्य अधिकारी डॉ. सुशीला गुप्ता, शोध अधिकारी डॉ. रीता कुमार, पुस्तकलायाध्यक्ष सुश्री. रोहिणी जाधव, प्रबंध समिति सदस्य श्री. प्रमोद देशपांडे, श्री. अब्बास एवं श्री. रईस,महाविद्यालय के ग्रंथपाल श्री. शहाजी वाघमोड़े, महाविद्यालय के प्राध्यापक एवं शिक्षकेतर कर्मचारी भी उपस्थित थे।   
        प्रस्तुत कार्यक्रम का आरम्भ सरस्वती पूजन से हुआ। इस अवसर पर महाविद्यालय की छात्रा पौर्णिमा चौरे ने अपने सुमधुर स्वर में सरस्वती वंदना प्रस्तुत की। साथ ही अतिथियों के स्वागत के उपलक्ष्य में स्वागत गीत प्रस्तुत किया। इस अवसर पर आए हुए सभी अतिथियों को महाविद्यालय की ओर से शाल, श्रीफल एवं स्मृति-चिह्न देकर सम्मानित किया गया । हिंदुस्तानी प्रचार सभा की विशेष कार्य अधिकारी डॉ. सुशीला गुप्ता ने अपने प्रास्ताविकी में भाषा के महत्व को स्पष्ट करते हुए भाषा के माध्यम से मन की बात मन तक पहुँचने की महत्वपूर्ण बात कही। इसके उपरांत सभी अतिथियों के करकमलों द्वारा पुस्तकालय के नामकरण फ़लक का अनावरण किया गया। 
        कार्यकारी समिति के सचिव श्री. दिलीप भोपतराव ने हिंदुस्तानी प्रचार सभा के कार्य की सराहना करते हुए पुस्तकालय के लिए दी गयी सहायता लिए हिंदुस्तानी प्रचार सभा के प्रति आभार प्रकट किया। हिंदुस्तानी प्रचार सभा के प्रबंध समिति के सदस्य श्री. प्रमोद देशपांडे ने अपने वक्तव्य में भारतीय भाषाओं के परस्पर सम्बन्धों पर प्रकाश डाला । इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि हिंदुस्तानी प्रचार सभा के ट्रस्टी व मानद सचिव श्री. फिरोज़ पैच ने पुस्तकालय की उपयुक्तता पर बल दिया ।

        प्रस्तुत कार्यक्रम का सूत्र-संचालन हिन्दी विभाग के प्राध्यापक संतोष गायकवाड ने किया तथा अंत में डॉ. अनिल सिंह ने उपस्थित सभी के प्रति आभार प्रकट किया । कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगीत से हुआ।      

विचार मंथन ·                      एकता का किला सबसे सुरक्षित होता है। न वह टूटता है और न उसमें रहने वाला कभी दुखी होता है।      - अज्ञ...